जगत हितकारणी
अनुपदासनी करमकुंडळी अने तेना खूनी कारनामा
आ वेबसाइटनो उद्देश
अनुपदासना आंधळा अनुयायीओनां काळां कारस्तान
अनुपदास कोण हतो?
"जगत हितकारनी"ना प्रकाशननो इतिहास
अनुपदासना पुस्तकमांथी चोंकावनारी अने भेजांगेप वातो
अनुपदासनी शेतानियत, बेवकूफी, मूर्खता अने लुच्चाईने उजागर करतां केटलांक महत्त्वपूर्ण उद्धरणो
अमने तमारा समर्थननी जरूर छे
अनुपदासना पुस्तकमांथी केटलीक चोंकावनारी अने भेजांगेप वातो
  • नोंध : दरेक अवतरणना अंते काउन्समां आपेलो नंबर ते "जगत हितकारणी" पुस्तकनी गुजराती आवृत्ति (२००५)नो पाना नंबर छे.
  1. आ जैन वाणियाओ आवा तीर्थ स्वरूपी घरडा स्त्री पुरुषने संसारना हाथे डाकण-डाकण करी मारी नखावे छे. (पृष्ठ नं. ४९)

  2. आ जैन वाणियाओए रावण करतां पण वधु पाप चलाव्युं छे. (पृष्ठ नं. ११३)

  3. जमीनमाता पण जैन सौदागरोना राक्षसीपापना कारणे बिमारीओ भोगवी रही छे. (पृष्ठ नं. १६२)

  4. आ वाणिया बेईमानो लंकाना ढेड छे. (पृष्ठ नं. ९७)

  5. रावणना समयमां आ पाप लंकामां ज प्रगट हतुं. तेथी वाणियाओने लंकाना ढेड कहे छे. (पृष्ठ नं. ९७)

  6. आ वाणिया एवा कजात छे, के जेवी रीते हिन्दुस्तानने अंदरो-अंदर लडावीने बरबाद करी दीधुं छे, एवी रीते बधी विलायतोने आपसमां लडावीने बरबाद करी देशे. आ वाणिया षडयंत्र करे छे. (पृष्ठ नं. १६७)

  7. आ वाणिया एवा दुष्ट अने हरामखोर छे, के ते पोताना पापथी अटकता नथी. (पृष्ठ नं. १३२)

  8. आ सौदागरोनी मार-झूड करीने तपास करो. (पृष्ठ नं. ७६)

  9. Anupdas kaa khuni panjaa

  10. तमे वाणियाओ रात-दिवस दुनियाना नामनुं पाप कोई टापु उपर करावी रह्या छो, ते नहीं बतावो तो अमे तमोने तमारा बाळ बच्चां साथे मारी नाखीशुं. (पृष्ठ नं. ७६-७७)

  11. आ सौदागरोने एवो-एवो डर आपवाथी थोडुं घणुं पाप करवानी जग्या बतावशे. कारण के आ जैन सौदागर महाजन खूब कपटी अने अप्रमाणिक छे. (पृष्ठ नं. ७७)

  12. ज्यां सुधी संसारना लोको आ सौदागर महाजनोने सजा नहीं करे त्यां सुधी महाजनो पोताना कुकर्मोने छोडशे नहि. (पृष्ठ नं. ७७)

  13. आ वाणियाना घरोमां गुप्त पापनी विद्या पेढी दर पेढीथी चाली आवे छे. (पृष्ठ नं. ७८)

  14. आ वाणिया थोडो घणो प्लेगनो रोग चलावीने पण संसारना लोकोने बरबाद करी दे छे. (पृष्ठ नं. १०७)

  15. दुनियामां बधा लोकोनी वय १२५ वर्षनी छे. परंतु आ सौदागरो कोईने पण पूरी वय जीववा देता नथी अने काची वयमां मारी नाखे छे. (पृष्ठ नं. ११८)

  16. रावण संसारना हाथे देवताओ उपर हाड मांस नंखावी रह्यो हतो, तेवी रीते आ वाणियाओ पण अत्यारे संसारना हाथे देवताओ पर हाड मांस नंखावी रह्या छे. (पृष्ठ नं. १३०)

  17. आ मूर्तिओने काढवानुं, जमीनने फाडवी, काळ वगेरेनुं पडवुं, जात-जातनी बिमारीओनुं थवुं, खजाना वगेरेने खेंचवुं, अक्कल वगेरेने फरवुं, वरसादनुं ना थवुं, नानी वयमां मृत्यु थवुं, आ बधुं जादुथी थई रह्युं छे अने आ इन्द्रजाळ जादु रावणनी माफक बलिराजाना पछी आ वाणियाओए चलावी राख्युं छे. (पृष्ठ नं. १३६) जेवी रीते आ बधा परचा थई रह्या छे, ते बधा जैन वाणियाओना चलावेला छे. (पृष्ठ नं. १३६)

  18. Anupdas kaa khuni panjaa

  19. अदालतमां न्याय करवावाळानी बुद्धि पण राक्षसी पापथी आ वाणियाओए फेरवी दीधी छे. (पृष्ठ नं. १४३)

  20. राक्षसी पापथी वाणियाओए संसारना तमाम लोकोने जूठ्ठानी जेवा करी दीधा छे. (पृष्ठ नं. १४७)

  21. न्यायाधीशोनी बुद्धि अने संसारना बधा लोकोनी बुद्धि आ वाणिया महाजनोए पोताना वशमां करी राखी छे. तेथी न्याय करवावाळा लोकोने साचा अने जूठ्ठानी समज पडती नथी. (पृष्ठ नं. १४७)

  22. आ वाणियाओ दरियाओनी वच्चे कोई टापु उपर गुप्त पापो करावी रह्या छे, के जेथी दिवसे ने दिवसे दुनियामां खराब थतुं जाय छे. (पृष्ठ नं. १४८)

  23. जे माणसे आ वाणियाओनुं राक्षसी पाप पकडयुं हतुं, तो ए ज समये तेमना राक्षसी पापने छोडावीने वाणियाओने मारी नाख्या होत, तो फरीथी आ राक्षसी पाप चालतुं नहीं, परंतु गुप्त पाप करवावाळाने मार्या नहि तेथी गुप्त पाप चाली रह्युं छे. (पृष्ठ नं. १५०)

  24. राजाओ तमारे ए वात ध्यानथी समजवी जोईए, के ज्यां सुधी ए पापने नहि छोडे त्यां सुधी एमनी प्रजा साथे कोईने जीवता ना छोडता. (पृष्ठ नं. १५१)

  25. "आ पुस्तक कोई धर्मनी के ज्ञाननी बाबते नथी" (पृष्ठ नं. १६२)

  26. ज्यारे माणस मरवानो थाय छे, त्यारे आ वाणिया तेमना राक्षसीपापथी मरवावाळानी जीभने बोलती बंध करी नाखे छे अने काची वयमां जादुथी मारी नाखे छे. (पृष्ठ नं. १७९)

  27. Anupdas kaa khuni panjaa

  28. जे धन वाणियाओए राक्षसी पापथी भेगुं कर्युं छे, तेने संसारना लोको बधा वहेंची लईने लई लेशो तो कोई दोष नथी. (पृष्ठ नं. १९१)

  29. आ वाणिया सूरज-चंदामाने एवां ग्रहण करावे छे, के पहेलांना जमानामां रावण सूरज-चंद्रमाने ग्रहण करतो हतो. (पृष्ठ नं. २१९)

  30. जमीनमाताने करोडो रोग छे. ते आ वाणियाओए जादुनी शक्तिथी करेलां छे. (पृष्ठ नं. २२२)

  31. आ वाणिया लोको तो पोताना राक्षसी पापथी वरसो वरस ग्रहण पाडे छे. अने ग्रहण विशे टीपणांनी अंदर अगाउथी लखी जाहेर करवामां आवे छे. आ टीपणां वाणियाओए चलावेलां छे. (पृष्ठ नं. ४१-४२)

  32. इन्द्रजाळना पापथी जानवरोने पण आ वाणिया अत्यंत दुःख दे छे. अने चोरासी लाख प्रकारना जीवात्माओने बेहद सजा आपे छे. (पृष्ठ नं. ४२)

  33. आ वाणिया जादुथी चोरासी लाख प्रकारना जीवात्माओने मारे छे. जेनुं पाप खूब थाय छे. खेतीवाडीमां पण जीवातो खूब पाडे छे. (पृष्ठ नं. ४२)

  34. आ जादुखोर लोको संसारने जुदी जुदी रीते गेरमार्गे दोरे छे. तमे घुवड नामना पक्षीने मारीने तेनी दवा बनावी कोईने पण आंखोमां नाखो अथवा कोई बीजानी स्त्रीनां कपडामां लगावी दो, तो ते व्यक्ति तमारा कहेवामां थई जाय, आवी आवी वार्ता चलावी लोकोने गेरमार्गे दोरे छे. (पृष्ठ नं. ४२-४३)

  35. देवताओनी समाधीओ उपर तेमना नामथी लोको पोताना हाथे जानवरोने मारी बली चढावे छे. तेओ धरमनी पूजा तो करता नथी. पण जीवोने मारवा लागे छे. आमां संसारना लोकोनो कोई दोष नथी. कारण के तेमनी बुद्धि जादुथी केद छे. (पृष्ठ नं. ४३)

  36. Anupdas kaa khuni panjaa

  37. आ वाणिया लोको पहेलां तो पोताना राक्षसी पापथी संसारना लोकोने बिमार करी दे छे. पछी एवुं बतावे छे के देवताओए बिमार कर्या छे. कारण देवता जानवरोनो बली मांगे छे. ते देवता उपर बकरानो बली चढावो, त्यारे तेमने आराम थशे. पछी ते बिमार व्यक्ति पोतानी बिमारीमांथी छूटवा माटे अने डरीने पोतानी जिंदगी खातर जानवरनो बली चढावी दे छे. आवुं करवावाळा लोको वाणियाना राक्षसी पापथी भूलेला छे. (पृष्ठ नं. ४३)

आवां उटपटांग, बिनवैज्ञानिक, निराधार, कपोळकल्पित, मानसिक विकृतिओथी भरेलां असंख्य विधानो धरावनार आ पुस्तक उपर प्रतिबंध मूकवा माटे पूरतां कारणो छे. खरेखर तो आ पुस्तकनुं नाम "जगत हितकारणी" एम नहीं पण "जैन अहितकारिणी" होवुं जोईतुं हतुं.