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  • नोंध : दरेक अवतरणना अंते काउन्समां आपेलो नंबर ते "जगत हितकारणी" पुस्तकनी गुजराती आवृत्ति (२००५)नो पाना नंबर छे.
  1. आ जैन वाणियाओनी जाळना लीधे देश-विदेशमां सोना-चांदीनी खाणो रही नथी. (४०)

  2. सोना-चांदीनी खाणो आकाश-पाताळमां पण रही नथी. (४०)

  3. बलि राजाना समयमां तो वगर खेती करे अने वावे एटलुं बधुं अनाज पेदा थतुं हतुं के कोई अंदाज न हतो. (४१)

  4. बलिराजाना समय पछी आ वाणियाओ इन्द्रजाळनुं पाप चलावीने धरतीमाताने खूब दुःख आपी रह्या छे. (४०)

  5. बलिराजाना समय पछी आ सौदागर महाजनो ए इन्द्रजाळनुं पाप करी दुनियानुं खराब करवानुं शरू कर्युं छे. (४१)

  6. आ वाणिया लोको तो पोताना राक्षसी पापथी वरसो वरस ग्रहण पाडे छे. अने ग्रहण विशे टीपणांनी अंदर अगाउथी लखी जाहेर करवामां आवे छे. आ टीपणां वाणियाओए चलावेलां छे. (४१-४२)

  7. पहेलांना जमानामां लोको खेतीवाडी वगेरे करता नहोता. खेती कर्या वगर ज अनाज वगेरे पेदा थतुं हतुं. (४२) ज्यारथी सौदागर महाजनोए काळ पडाववानुं शरू कर्युं छे त्यारथी खेतीवाडी करवानी जरूर पडी छे. (४२)

  8. दुनिया भरना लोकोनी बुद्धि आ सौदागर महाजनोए पोताना राक्षसी पापथी खराब करी दीधी छे. (४२)

  9. इन्द्रजाळना पापथी जानवरोने पण आ वाणिया अत्यंत दुःख दे छे. अने चोरासी लाख प्रकारना जीवात्माओने बेहद सजा आपे छे. (४२)

  10. आ वाणिया जादुथी चोरासी लाख प्रकारना जीवात्माओने मारे छे. जेनुं पाप खूब थाय छे. खेतीवाडीमां पण जीवातो खूब पाडे छे. (४२)

  11. आ वाणियाओनुं नाम जादुखोर राख्युं छे. कारण के आ जादुखोर लोको जमीनमातानुं पाप करावीने जमीनमां आग पण लगाडे छे. जेनाथी करोडो जीव बळी जाय छे. (४२)

  12. आ जादुखोर लोको संसारने जुदी जुदी रीते गेरमार्गे दोरे छे. तमे धुवड नामना पक्षीने मारीने तेनी दवा बनावी कोईने पण आंखोमां नाखो अथवा कोई बीजानी स्त्रीनां कपडामां लगावी दो, तो ते व्यक्ति तमारा कहेवामां थई जाय, आवी आवी वार्ता चलावी लोकोने गेरमार्गे दोरे छे. (४२-४३)

  13. आ वाणिया लोकोए पहेलां तो राक्षसी पापथी बधानी बुद्धि खराब करी दीधी छे. एटले लोको दया धरम पण जाणता नथी. (४३)

  14. देवताओनी समाधीओ उपर तेमना नामथी लोको पोताना हाथे जानवरोने मारी बली चढावे छे. तेओ धरमनी पूजा तो करता नथी. पण जीवोने मारवा लागे छे. आमां संसारना लोकोनो कोई दोष नथी. कारण के तेमनी बुद्धि जादुथी केद छे. (४३)

  15. आ वाणिया लोको पहेलां तो पोताना राक्षसी पापथी संसारना लोकोने बिमार करी दे छे. पछी एवुं बतावे छे के देवताओए बिमार कर्या छे. कारण देवता जानवरोनो बली मांगे छे. ते देवता उपर बकरानो बली चढावो, त्यारे तेमने आराम थशे. पछी ते बिमार व्यक्ति पोतानी बिमारीमांथी छूटवा माटे अने डरीने पोतानी जिंदगी खातर जानवरनो बली चढावी दे छे. आवुं करवावाळा लोको वाणियाना राक्षसी पापथी भूलेला छे. (४३)

  16. आ वाणियाओ पोताना राक्षसी पापथी साधु फकीरोने पण एवुं सुझाडे छे, के समाधिओ उपर बकरा वगेरे चढाववुं सारुं छे. जीवो उपर साधु फकीरो दया पण करे, तो राक्षसी पापना जादुथी वाणियाओ तेमने दया पण करवा देता नथी. तेथी साधु फकीरोने दया आवती नथी, अने तेओ अधर्मनुं काम करवा लागी जाय छे. आ वाणियाओ राक्षसी पापथी साधु फकीरोने पण बिमार पाडी दे छे. (४४)

  17. बिमारना घरे बकरा पाडा वगेरे जीवो देवताना नामे मारवामां आव्या छे, (४४)

  18. रावणनी माफक आ वाणियाओए पण आ राक्षसी विद्यानुं पाप चलाव्युं छे. (४४-४५)

  19. आ सिवाय संसारनी अंदर कोलेरानी बिमारीथी करोडो माणसोने मारे छे. अने राजा बादशाहोना हाथे करोडो जानवरोने मरावे छे. करोडो बकरा वगेरेनी चामडीने चीरी-चीरीने झाडनी कूंमळी डाळीमां बांधी बांधीने लटकावी दे छे. संसारना लोको चामडाना चीरा ना करे तो बिचारा संसारना लोकोने जादुथी बिमार करी दे छे. (४५)

  20. आ वाणियाओ पोताना राक्षसी पापथी वनस्पति जेवी चीजोमां पण भूतप्रेत बतावे छे. अने दुनियाना लोकोना हाथेथी झाडोमां खीला मरावे छे. (४५)

  21. झाडनी अंदर ना तो भूत छे, के ना तो प्रेत छे. आ तो फक्त जैन सौदागर महाजनोनी जाळ छे. कारण के आपणा लोकोनी बुद्धि भ्रष्ट करी दीधी छे, तेथी एवुं सूझे छे. (४५-४६)

  22. सौदागर महाजनोनी जाळ तो त्यां सुधी पण छे, के लोकोने ऊंघमां सपनां पण करे छे. (४६)

  23. ना कोई भूत छे, के ना कोई डाकण छे. आ तो वाणियाना घरनुं राक्षसी पाप छे. (४६)

  24. संसारने तो खबर नथी, के आ वाणियाओनो जादु छे. तेने लोको भूत अने प्रेत समजे छे. (४७)

  25. तमे संसारना लोको तपास करो, आ पाप तो आ महाजनोनुं जाहेर छे. (४७)

  26. सौदागर महाजनो ए संसारनुं खराब करवा माटे पशुओ उपर लोकोना हाथे आवो जुलम कराव्यो छे. (४७)

  27. बधां पाप वाणियाओना कुळना माणसोना हाथे ज थाय छे. आ तो एवां एवां पाप छे के जे रावणे दरियाओनी पार अलोप पाप चलाव्यां हतां. (४७)

  28. जेवी रीते रावण राक्षसी विद्याना पापथी केटलाय प्रकारनां सपनां करावतो हतो. तेवी ज रीते अत्यारे आ वाणिया पण केटलाय प्रकारनां सपनां सुझावे छे. (४८)

  29. पहेलां रावण, कंस अने कारुन वगेरेए राक्षसी विद्यानुं पाप चलाव्युं हतुं. त्यारे तेओ पण आ वाणियानी माफक कंईनुं कंई देखाडता हता. आ वात दुनियाना लोको सौ जाणे छे, के तेओ राक्षसी विद्याथी देखाडता हता. परंतु आ वाणिया तो रावण वगेरे करतां पण वधु पडतुं कंईनुं कंई सुझाडे छे. ते वातनो ख्याल कोईने पण आववा देता नथी. (४८)

  30. संसारना लोको जरा मन लगावीने सांभळो. ज्यां नानुं गाम छे, त्यां पचास-सो डाकणो बनावी छे. अने ज्यां मोटुं शहेर छे त्यां धणी बधी डाकणो बनावी छे. पुराणोमां लख्युं छे अने दुनिया पण जाणे छे, के घरडा माणसो तीर्थ के मंदिर बराबर छे. परंतु तेमना माथे बदनामी आपवा माटे तेमने डाकण बनावीने आ जैन वाणियाओ आवा तीर्थ स्वरूपी घरडा स्त्री पुरुषने संसारना हाथे डाकण-डाकण करी मारी नखावे छे. (४९)

  31. आ वाणियाओए पाप करीने गरीब लोकोनी बुद्धि खराब करी होवाथी, गरीब लोकोने अंदरो-अंदर लडावीने दुःखी करे छे अने मरावे छे. (४९)

  32. आ वाणियाओए आवुं राक्षसी पाप एटला माटे चलाव्युं छे, के आ राक्षसी पापथी कुल संसारनुं धन तेमना काबुमां करी शके. (४९)

  33. आ वाणियाओए दुनियानुं घणुं बधुं धन पोताना काबुमां करी लीधुं छे. संसारना माणसोने आ वाणिया पोताना राक्षसी पापथी बिमार करे छे. (४९-५०)

  34. आ सौदागर महाजनो संसारना नामनुं जादुथी अलग-अलग प्रकारनुं पाप चलावीने लोकोने बिमार करीने काची उंमरमां मारी नाखे छे. (५०)

  35. परमात्माए तो बधाने पूरी वय जीववा आपी छे. कायमथी लोको घरडा-बुढ्ढा थई पूरी वय जीवीने ज मरे छे. परंतु आ वाणियाओए रावणनी माफक संसारमां लोकोना मोतने पोताना काबुमां करी लीधुं छे. पहेलांना जमानामां पिताना पहेलां पुत्र मरतो न हतो. परंतु अत्यारना समयमां पिताना पहेलां पुत्र मरी जाय छे. तो शुं पहेलां अने अत्यारे ईश्वर बीजो हतो? परंतु ईश्वर तो एकनो एक ज छे आवां-आवां पाप तो आ वाणियाओए जाहेर चलाव्यां छे. जेने आखुं विश्व पोतानी आंखे जोई रह्युं छे. (५०-५१)

  36. आ वाणियाओए तमारी बुद्धिने राक्षसी पापथी खराब करी छे. तेथी तमे संसारना लोको पाप करो छो अने भक्त लोकोना नामथी जानवरोने मारो छो. तेनाथी जगतनी बुद्धि रात-दिवस खराब थई जाय छे. परंतु आ वाणियाओए तो पोतानो स्वार्थ पूरो करवा आ राक्षसी पाप चलाव्युं छ. (५१)

  37. दुनियानुं भलुं थाय अने परमेश्वर खुश थाय तेवुं तमोने बतावे तो तमे तेनो स्वीकार करता नथी. नीति धर्मनी वात स्वीकारवा तमारो आत्मा तैयार थतो नथी अने पापनी वातो माटे तमारो आत्मा तरत तैयार थई जाय छे. तेनुं कारण ए छे के वाणियाओए पोताना राक्षसी पापथी बधानी बुद्धि खराब करी दीधी छे. (५१)

  38. सतयुगमां कोई वांझिया रहेता नहि. बधाने संतान थतां अत्यारे जे लोको वांझिया रहे छे. तेमने संतान थतां नथी तेनुं कारण आ वाणिया लोकोना घरनुं राक्षसी पाप छे. जे स्त्री-पुरुषना नामनुं पाप करावे, तेने बाळको थतां नथी. कोई कोईने एवुं पण सुझावे छे, के भैरवना नामना के देवीना नामना बकरा-पाडा वगेरे चढावो तो तमने पुत्र पेदा थशे. अने लोको तेमना नामथी बकरा-पाडानी बलि चढावे, तो तेमने पुत्र पेदा थाय छे. ज्यारे वाणिया तेमना नामनुं पाप छोडी दे छे, त्यारे तेमने पुत्र जन्मे छे. अने जो वाणिया तेमना नामनुं पाप करवानुं छोडे नहि, तो बाळकनो जन्म थतो नथी. (५१-५२)

  39. रावणे तो थोडुं ज पाप चलाव्युं हतुं, पण आ वाणियाओए तो एटलुं बधुं पाप करवानुं शरू कर्युं छे, के दुनियाना हाथे देवताओ उपर जानवरोने मरावे छे. आ बधुं हुं अने तमे बधा जाणीए छीए. (५२)

  40. ज्यां गुप्त पाप समुद्रनी वच्चे थई रह्युं छे, त्यां वाणियाओ सिवाय बीजुं कोई पण जई शकतुं नथी. तेथी वाणियाओनी जाळनी कोईनेय पण खबर पडी शकती नथी. (५२)

  41. पहेलांना जमानामां सोना-चांदीना ठाठमाठ हतां ते अत्यारे नथी, तो ते क्यां गयां? ....... पहेलांना जमानामां धन बहु हतुं अने सोना-चांदीनी खाणो पण हती. आ सौदागर महाजनो ए आ खाणोने गूम करी दीधी छे. सोना-चांदीनी खाणो छे ते जमीनमातानी चरबी छे. परंतु आ वाणियाओ जमीनमाताना नामनुं पाप करावे छे तेथी चरबी ओगळी गई छे. आ वातनो तमारे लोकोने विचार करवो जोईए, के दरेक प्रदेशमां सोना-चांदीनी खाणो हती. ते क्यां गई? (५३)

  42. आ वाणिया लोको ज्यारथी काळ पाडवा लाग्या छे त्यारथी जात-जातना रोग जमीन माताने करी दीधा छे. (५३-५४)

  43. आ वाणिया महाजनोए जमीनमाताने जादुथी रोग करीने बिमार करी छे. जेथी तेनुं रूप जमीनमाता गुमावी बेठी छे. तेथी पथ्थरोनी खाणोनुं एटले के पहाडोनुं रूप (तेज) जतुं रह्युं छे अने हीरा पन्नानी रोशनी पण चाली गई छे. (५४)

  44. आ सोना-चांदीनी खाणो हती, ते हवे जमीन आसमानमां पण रही नथी. अने बधी ज चीजो निस्तेज थई गई छे. तेनुं कारण ए छे, के आ वाणिया लोको जमीन माताना नामनुं पाप करावे छे. तेथी ज जमीनमाताना शरीरमां बारे महिना तकलीफ रे छे. (५४)

  45. जेवी रीते रावणे अने हरणाकंसे त्रण लोकोनी बुद्धि भ्रष्ट करी दीधी हती. तेवी ज रीते सौदागर महाजनो ए पण त्रण लोकोनी बुद्धि भ्रष्ट करी दीधी छे. जेथी भाई-भाईमां संप रह्यो नथी. दुनियानी बुद्धि राक्षसी पापथी एटली बधी खराब करी छे, के माणसो नासमज जानवरोनी माफक थई गया छे. (५४)

  46. राक्षसी वेदनां पुस्तको अने टीपणां वगेरे छे, ते बधां वाणियाओना घरेथी चलावेलां छे. ते पुस्तकोने काममां लईने दुनिया बधी भूलमां पडी छे. (५५)

  47. आ दुनियामां लोकोने भुलाववा माटे आवी आवी वातो वाणियाओए पुस्तको अने टीपणांमां चलावी छे. आ जमानाना लोको गीताने खूब माने छे, जेमां लख्युं छे, के श्री कृष्णजी महाराजे पोताना मोंढामां त्रण लोकनां दर्शन अर्जुनने कराव्यां हतां, ते वात पण दुनियाने भुलाववा माटे जूठी चलावाई छे. अने पुस्तको पण दुनियामां जूठां चलाव्यां छे. (५६)

  48. वरसाद वरसे छे, तेने दुनिया इन्द्र महाराज कहे छे, ते इन्द्र महाराज तो जगतने तारवावाळा अने दीन दयाळुं छे. परंतु आ वाणियाओए एवी जूठी जाळ चलावी छे, के पाणी माणस बनीने अहल्या साथे हराम कार्य करवा आव्युं. इन्द्र महाराज पाणीनुं ज नाम छे. पाणी तो दीन दयाळ छे अने जमीन आसमान बधुं जळनी ज माया छे. अने पाणीनी ज उत्पति छे, तेथी पाणी कोई माणस थोडुं छे? पाणी तो वरसे त्यारे जमीनमाता पीवे छे. ते बधा जुए छे. जो के संसारे गौतम ऋषिनी पत्नीने पाप लगाव्युं छे ते वाणियाओनुं जाळ छे. (५७)

  49. संसारना लोको एवुं कहे छे, के अहल्या पोताना पतिना श्रापथी पथ्थरनी बनीने आकाशमां चाली गई हती. आ वात बिलकुल जूठी छे. अने ए विचारवाने योग्य छे. स्त्री पथ्थर थई शकती नथी अने आकाशमां पण जई शकती नथी. आ तो वाणियाओए दुनियाने भूलमां नाखवा माटे राक्षसी पाप चलाव्युं छे. आ गौतम ऋषि अने इन्द्र महाराज वगेरेनी वार्ताओ जेवी अनेक प्रकारनी जूठी वातो दुनियामां प्रगट करी छे. आ बधी वातो तुलसीकृत रामायणमां जे तुलसीदासनी बनावेली छे, अने भागवतमां लखेली छे, अने अवतार चरित्रमां पण लखेली छे. तमे संसारना लोकोए आ पुस्तकोमां आ वातो लखेली जोई हशे अने कदाच ना जोई होय तो जोई लेजो. (५९)

  50. आवी-आवी अनेक प्रकारनी घटनाओ एक पुस्तकमां नहि पण हजारो पुस्तकोमां लखेली छे. तो तमे संसारना लोको जोई लो, के आ जूठनो कोई पार नथी. हजारो वातो जूठी राक्षसी पुस्तकोमां लखी दीधी छे. अने दुनिया आंधळी ए पुस्तकमां लखेली वात साची मानीने चाले छे. कारण के दुनियानी बुद्धि तो राक्षसी पापथी केद छे. तेथी जूठ पण साचुं लागे छे अने वातनो विचार करता नथी, के आ पुस्तकोमां लखेली वातो साची छे, के जूठी. आवी जूठी घटनाओ आ महाजनोए पुस्तकोमां लखीने पहेलांना साचा लोको जे थई गया छे. तेमना नामथी आ राक्षसी पुस्तको दुनियानुं खराब करवा माटे चलावी दीधा छे. आवुं करवाथी वाणिया लोकोनी जाळ दुनियामां जाहेर न थाय तेथी आ वाणियाओए आवां पुस्तको आगळना साचा लोकोना नामथी लखीने चलावी दीधां छे. अने दुनियाना लोको ए पुस्तकोने पहेलांना साचा लोकोनां लखेलां समजीने चाले छे. (६०)

  51. राक्षसी पुस्तकोमां आ महाजनोए एवी चालाकी करी छे, के पुस्तको परमेश्वरना नामनां चलाव्यां छे. वळी तेमां कोई-कोई वात साची पण लखी दीधी छे. जेथी दुनियाना लोको ते पुस्तकोने राक्षसी अने जूठी ना समजे, ते माटे आवी होंशियारी करेली छे. (६०)

  52. रावणना समयमां रामचंद्रजी अने कंसना समयमां श्री कृष्णजी जेवा लोकोए आवां राक्षसी जाळनां पुस्तको अने टीपणांने पाणीमां डूबाडीने तेनो नाश कर्यो हतो. (६१)

  53. श्री कृष्ण महाराजे पोताना हाथथी आखा पहाडने ऊठावी लीधो हतो. अने ते पहाड वडे व्रजनी उपर छांयो करीने व्रजने पाणीथी डूबतुं बचाव्युं हतुं. आ वात पण जूठी छे. विचार करवा लायक छे. कारण के पहाड कोईनाथी पण ऊठावी शकातो नथी. कारण के शुं पहाड एक शेर, बे शेर के बे मणनो हतो, के जेने ऊठावी लीधो हशे? आ वात सौदागर महाजनोना राक्षसी पापनी छे. हवे तमे संसारना लोको आ वात उपर विचार करीने होंशियार थईने आ वाणियाओना पापने छोडावो. (६२)

  54. आ वाणिया लोको दुनियामांथी त्रण भागना लोकोने बरबाद करी नाखशे. (६५)

  55. पहेलां पण रावणनी माफक आ वाणियाओए राक्षसी पाप चलाव्युं हतुं. परंतु ज्यारे तेमना जाळनी खबर राजा-बादशाहोने पडी, त्यारे तेमणे तपास करेली, त्यारे वाणियाओने सजा करेली अने जेटलां पण मंदिर जैन धर्मनां हतां ते एक-बे वखत पडावी नाख्यां हतां, अने मंदिरोनी अंदर मूर्तिओ हती तेनां नाक-कान कापी नाखेलां. (६६)

  56. अत्यारे तो दुनियाना लोको वधु छे अने जैन वाणियानी जातना लोको ओछा छे. आ वाणियाओए एवुं विचारी राख्युं छे, के ज्यारे संसारनी अंदर राजा-बादशाह अने प्रजा थोडी रहे, त्यारे अमे वाणिया अमारुं राज करशुं. ज्यां सुधी दुनियानी वसति वाणिया करतां वधु छे त्यां सुधी वाणिया डरे छे. संसारना लोको ओछा थई गया, तो ते तरत ज तेमनुं राज स्थापी देशे. (६९)

  57. आ वाणियाओ संसारने मारवा इच्छे तो लोकोनी ज बुद्धि भ्रष्ट करीने अंदरो-अंदर लडावीने मारी नाखे छे. (६९)

  58. हिन्दुस्तानमां हिन्दु-मुसलमानोनां संतानोने आ वाणिया विदेशीयोने लावीने तेमना राक्षसी पापथी बुद्धि खराब करीने मरावे छे. (६९)

  59. जेवी रीते दुनियाना लोकोने सपनुं आवे छे, तेवी रीते साधु अने फकीरोने पण सपनुं आवे छे. आ वाणियाओ तेमने पण कंईनुं कंई देखाडी दे छे अने साधु फकीर आ सपनाने परमेश्वरनी कुदरत समजे छे. जेवुं सपनुं जुए छे तेवुं ज थई जाय छे. परंतु आवो ख्याल दुनियामां कोई साहेब करता नथी के आ वाणियाना घरनुं राक्षसी पाप छे. (६९-७०)

  60. आ वाणियाओनुं जूथ हिन्दुस्तानमांथी रावणनी माफक पाप करवा माटे नीकळ्युं छे. (७१)

  61. जैन मंदिरो तोडवानी अने मूर्तिओना नाक कापवानी जरूरियात एटला माटे ऊभी थई हती. के आ सौदागर महाजनोए राक्षसी विद्यानुं पाप चलाव्युं हतुं ए वातनी बादशाहने खबर पडी जवाने कारणे जैन वाणियाओनां मंदिर अने मूर्तिओने तोडावी नाख्यां हतां. ते छतां पण सौदागर महाजनो पोतानी जात उपर जईने अत्यारे पण एवी ज रीते राक्षसी पाप चलावी रह्या छे. (७१)

  62. आ वाणियाओ जादु करतां घणीवार झडपाई पण गया छे अने सजा पण भोगवी छे. केटलीय वार धर्मनी अने गाय सूवरना सोगंध पण लीधा छे. (७५)

  63. ज्यां सुधी तमे संसारना लोको आ सौदागरोने कष्ट नहि आपो अने सजा नहि करो अने तेमनी तपास नहि करो त्यां सुधी आ वाणिया राक्षसी पाप करवानुं कदापी छोडशे नहि. (७५)

  64. आ सौदागरोनी मार-झूड करीने तपास करो. (७६)

  65. जे पुस्तको हिन्दु-मुसलमान वांचे छे, ते बधा वाणियाना घरेथी चलावेलां छे. अने जाळनी खबर दुनियाने आज सुधी थई नहोती. परंतु हवे अमने साधु अनुपदासे अमारा संतानोनी जिंदगी बचाववा तमारी जाळथी परिचित कर्या छे. तेथी तमारी जाळनी अमोने खबर पडी छे. नहितर आज सुधी अमे बधा संसारना लोको तमारी जाळथी अजाण हता. परंतु बाबाए अमारा संतानोने बचाववा अने दुनियामां सत्ययुग लाववा माटे तमारा पापने प्रगट कर्युं छे. जे तमे वाणियाओ रात-दिवस दुनियाना नामनुं पाप कोई टापु उपर करावी रह्या छो, ते नहीं बतावो तो अमे तमोने तमारा बाळ बच्चां साथे मारी नाखीशुं. (७६-७७)

  66. आ सौदागरोने एवो-एवो डर आपवाथी थोडुं घणुं पाप करवानी जग्या बतावशे. कारण के आ जैन सौदागर महाजन खूब कपटी अने अप्रमाणिक छे. (७७)

  67. ज्यां सुधी संसारना लोको आ सौदागर महाजनोने सजा नहीं करे त्यां सुधी महाजनो पोताना कुकर्मोने छोडशे नहि. (७७)

  68. सौदागर महाजन दिल्ही मंडळथी ऊठीने पाप कराववा माटे रावणनी माफक कोई टापु उपर गया छे. तेओ त्यां दुनियाना नामनुं रात-दिवस पाप करावी रह्या छे. (७७)

  69. आपणने तेमना जाळनी खबर पडती नथी. तेनुं कारण ए छे, के तेमणे पोताना राक्षसी पापथी लोकोनी बुद्धि पहेलांथी खराब करी दीधी छे. एवी रीते खराब करी छे, के तेमने अने तेमना कपटने कोई पण ओळखी ना शके. (७८)

  70. आ वाणियाओए गुप्त पापनुं स्वर्ग बनाव्युं छे, ते तेमना कब्जामां राखे छे अने त्यां पोतानी ज्ञातिना लोकोना हाथे दुनियाना नामनुं पाप करावे छे. (७८)

  71. आ वाणियाना घरोमां गुप्त पापनी विद्या पेढी दर पेढीथी चाली आवे छे. (७८)

  72. आ सौदागर महाजनोए पण बलिराजाना समय पछी कोई टापु पर पोताना संतानोने राक्षसी पाप करवा टापू पर मोकल्या छे. (७९)

  73. आ वाणिया बेईमानो लंकाना ढेड छे. (९७)

  74. रावणना समयमां आ पाप लंकामां ज प्रगट हतुं. तेथी वाणियाओने लंकाना ढेड कहे छे. (९७)

  75. तमे साचां वेदनां पुस्तको जाणो छो. आ राक्षसी पुस्तको आ वाणियाओनां चलावेलां छे. (९८)

  76. आ वाणिया थोडो घणो प्लेगनो रोग चलावीने पण संसारना लोकोने बरबाद करी दे छे. (१०७)

  77. आ जैन वाणियाओए रावण करतां पण वधु पाप चलाव्युं छे. (११३)

  78. आ महाजन जूठ्ठाओए एवुं तो पाप चलाव्युं छे, के जेम कोई माणस दारूने पीवे पछी मस्त थई जाय छे अने सारी के खराब वातने बेहोशीमां समजी शकतो नथी, एवी रीते संसारना लोको हुं समजावुं छुं छतां समजी शकता नथी. कारण के आ वाणियाओए बधानी बुद्धि पोताना राक्षसीपापथी एवी खराब करी दीधी छे, के समजाववा छतां समजता नथी. (११३)

  79. हुं लोकोने खूब समजावुं छुं, के आ वाणिया पाप करावे छे. परंतु कहेवा छतां कोई मानतुं नथी के समजतुं नथी. (११४)

  80. हजारो रूपियानो खर्च करुं छुं. हुं दुःख भोगवीने संसारने जाण करु छुं, तो पण संसार समजतो नथी. (११४)

  81. हुं जीवुं छुं, त्यां सुधीमां आ सौदागरनुं कपट छूटी गयुं तो छूटी जशे अने संसारनां संतानो बची जशे. नहींतर वाणियानी चोरी कोई हिसाबे पण जाहेर नहीं थाय. (११६)

  82. मालिकना घरमां तो बधाने वय पूरी आपेली छे अने आ जमानामां तो माणसनी वय १२५ वर्षनी छे. तो १२५ वर्षनी वय मारी पण छे. अने मारो जन्म चैत्र सुद १४ संवत १९०५नो छे. आ तिथि अने आ संवतना हिसाब मुजब संवत २०३० सुधी मारी वय होवी जोईए. आ वय कोई माणसे आपेली नथी, आ तो परमेश्वरे आपेली छे, अने आ रीते दुनियामां बधा लोकोनी वय १२५ वर्षनी छे. परंतु आ सौदागरो कोईने पण पूरी वय जीववा देता नथी अने काची वयमां मारी नाखे छे. ..... आ वाणिया मने पण तेमना राक्षसी पापथी काची वयमां मारी नाखशे. (११८)

  83. हुं तो दुनियाना संतानोने मरता जोउं छुं, तेथी तेमने जीवता राखवा माटे वाणियाओना पापने परमेश्वरना लेखे जाहेर करूं छुं. (१२३)

  84. आ वाणियाओए बधानी बुद्धि एटली बधी खराब करी दीधी छे, के मारा समजाववा छतां समजता नथी अने हसवा लागे छे, आ ना समजवानुं प्रमाण छे. (१२५)

  85. हुं समजावुं छुं, परंतु बधा लोको बुद्धि फरवाना कारणे एवुं कहेवा लागे छे, के बाबा गांडा थई गया छे, कोई एम कहे छे के खसी गयुं छे, अहीं-तहीं बकवास कर्या करे छे. कोई एवुं कहे छे, के बाबानो माल-सामान अने जमीन जायदादने कोई वाणियाओए लई लीधी छे, तेथी तेमने बदनाम करे छे. (१२५)

  86. अरे मारा भाईओ! वाणियाए कोई मारो माल-सामान वगेरे लई लीधो नथी. परंतु तमारी बुद्धि आ वाणियाओए तमे समजी ना शको ते माटे फेरवी नाखी छे. तेथी तमे लोको पोत-पोताना मांढेथी मने गरीबने आवी, ना कहेवानी वातो कहो छो. (१२६)

  87. तमे लोको मने गांडो कहो छो, तो मारा दिलमां मने केटलुं खराब लागतुं हशे! माथुं फोडीने मरी जाउं एवुं विचारुं छुं, परंतु एवुं करतो नथी, कारण के हुं ज आ वाणियाओनी जाळ ने जाहेर नहीं करूं तो पछी कोण करशे? (१२७)

  88. आ वातनी तपास अंग्रेजो वगेरे पण करता नथी. तेमने पण मूळ भेद मळ्यो नथी. काची वयमां मरवानो मूळ भेद ए छे, के माणसो वगरे काची वयमां जादु वगर मरता नथी अने ना तो ईश्वरनो हुकम छे. जादुनी शक्तिथी काची वयमां मरे छे. तेनुं खास कारण ए छे, के आ सौदागर महाजनो जेना नामनुं जादु करावे छे, तेओ मरी जाय छे. आ जादुनुं काम दरियाओ वच्चे कोई टापुनी उपर करावी रह्या छे. ज्यां सौदागर महाजनोना सिवाय कोई जई शकतुं नथी. (१३०)

  89. रावण संसारना हाथे देवताओ उपर हाड मांस नंखावी रह्यो हतो, तेवी रीते आ वाणियाओ पण अत्यारे संसारना हाथे देवताओ पर हाड मांस नंखावी रह्या छे. (१३०)

  90. आ वाणिया एवा दुष्ट अने हरामखोर छे, के ते पोताना पापथी अटकता नथी. (१३२)

  91. वाणियाओए जादुना बळथी जोतजोतामां तो राजाना खजानाओने जमीनना रस्ते खेंची लीधा छे. (१३२)

  92. ज्यारे आ वाणियाओ कोईना भंडारने खेंचवा इच्छे छे, त्यारे पहेलां जमीन फाटवाना नामनो जादु करावे छे. ज्यारे जादुना अत्याचारथी जमीन माता फाटी जाय छे त्यारे राजाना भंडारने खेंची ले छे. परंतु जादु महाजनो समुद्रनी उपर कोई टापुमां करावे छे, के ज्यां चोरासी लाख कुंडीओ लोहीपरुंनी बनावी छे. (१३२-१३३)

  93. आ वाणिया एवुं पण करे छे, के पहेलांना जमानामां भक्त लोको महादेव अने देवी देवता वगेरे थई गया छे, तेमनी समाधिओनी उपर लोको बकरा-पाडा वगेरे चढावे छे. (१३४)

  94. आ महाजन लोको धरतीमाताने सांधाना वानो रोग करी दे छे. (१३४)

  95. जेवी रीते माणसना शरीरमां सांधाना वाना कारणे शूळ भोंकाय अने दुःखना लपकारा थता-थता घणी झडपथी कमरमां अथवा पगमां जईने थवा लागे, तो तेनाथी माणसने घणुं कष्ट थाय छे, आवी ज रीते जमीनमाता पण आ रोगथी खूब दुःखी थाय छे. (१३४-१३५)

  96. मंदिरोनी मूर्तिओने पण जादुनी शक्तिथी तेओ इच्छे, ते मुजब दूर सुधी जमीन फाडीने बहार नीकाळे छे. (१३५)

  97. आ मूर्तिओने काढवानुं, जमीनने फाडवी, काळ वगेरेनुं पडवुं, जात-जातनी बिमारीओनुं थवुं, खजाना वगेरेने खेंचवुं, अक्कल वगेरेने फरवुं, वरसादनुं ना थवुं, नानी वयमां मृत्यु थवुं, आ बधुं जादुथी थई रह्युं छे अने आ इन्द्रजाळ जादु रावणनी माफक बलिराजाना पछी आ वाणियाओए चलावी राख्युं छे. (१३६)

  98. जेवी रीते आ बधा परचा थई रह्या छे, ते बधा जैन वाणियाओना चलावेला छे. (१३६)

  99. आ जादु के पापना विशे बादशाह एडवर्ड बहादुरनी सामे अरज करीने बंध कराववामां आवे. आ पापनी शोधमां विलायतना बधा अंग्रेजो छे. तेओ तपास करी रह्या छे, के एवी कई वात छे, के जेनाथी वर्षो वर्ष करोडो माणसो कोलेरा अने प्लेग वगेरेनी बिमारीने कारणे मरी जाय छे अने करोडो लोको नानी वयमां बीजी घणी बिमारीओना कारणे मरी जाय छे? परंतु अत्यार सुधी चोख्खे-चोख्खी खबर पडी नथी, के आ बधुं कया कारणथी मरी जाय छे. आ वातथी हुं साधु अनुपदास हकीमो, तबीबो अने डोक्टरो अने संसारना बधा लोको अने अंग्रेजोने माहितगार करूं छुं, तो तेनो बंदोबत्स करो जेथी कोई माणस काची वयमां मरे नहि. सौदागर महाजन जमीन माताने दूबळी थई जवाना, स्त्री, पुरुषोने नानी वयमां मरवाना, हवा वधु चालवाना, झाड वगेरेने जमीनथी उखाडवाना, वरसाद जमीन पर ना थवाना, संसारना लोकोनी बुद्धि भ्रष्ट थवाना, परस्त्रीथी भोग करवाना, जानवरोथी खराब काम कराववाना अने स्त्रीओने वांझणी रहेवाना नामनुं पाप चोरासी लाख कुंडीओ उपर करावीने, चोरासी लाख जीवात्माओने दुःख आपे छे अने आ सौदागर लोको तडपावे छे, त्यारे आ पाप बधाने लागी जाय छे. तेओ जेवी रीतनुं पाप करावे छे, तेवी रीतनुं खराब थाय छे. (१४०)

  100. संसारमां बधानी बुद्धि आ सौदागरोना राक्षसी पापथी फरेली छे, तो एवी रीते अदालतमां न्याय करवावाळानी बुद्धि पण राक्षसी पापथी आ वाणियाओए फेरवी दीधी छे. एटला माटे अदालतमां जे वाणियो जूठो छे ते साचो थई जाय छे. (१४३)

  101. दुनियामां तमाम लोकोनी अने राजा बादशाहोनी बुद्धि केद थयेली छे. तेथी ते जैन वाणियाओने ज साचा माने छे. (१४५)

  102. राक्षसी पापथी वाणियाओए संसारना तमाम लोकोने जूठ्ठानी जेवा करी दीधा छे. (१४७)

  103. न्यायाधीशोनी बुद्धि अने संसारना बधा लोकोनी बुद्धि आ वाणिया महाजनोए पोताना वशमां करी राखी छे. तेथी न्याय करवावाळा लोकोने साचा अने जूठ्ठानी समज पडती नथी. (१४७)

  104. आ वात पण खूब ध्यान दईने विचारवा जेवी छे, के मारा जीवता जीवतामां राजा-बादशाहोए एकदील थई आ सौदागरोना राक्षसी पापने एक मन थई छोडाववानो प्रयत्न कर्यो, तो हुं विश्वास राखुं छुं के जरूर छूटी जशे, नहि तो पछी तमारा लोकोथी क्यारेय नहि छूटे. कारण के तमने एमना कपटनी पूरेपूरी जाण नथी. (१४८)

  105. आ वाणियाओ दरियाओनी वच्चे कोई टापु उपर गुप्त पापो करावी रह्या छे, के जेथी दिवसे ने दिवसे दुनियामां खराब थतुं जाय छे. (१४८)

  106. तमे बधा साहेबो लागणी राखीने अने एक मन थई एमनी जाळने मारा जीवता जीवतामां बंध करावशो तो बंध थशे नहि तो मारा मरी गया पछी तमाराथी आ सौदागरोनुं राक्षसी पाप बंध थशे नहि. (१४८)

  107. मारा मृत्यु पछी जो तमे आ सौदागरोना पाप (जादु)ने बंध कराववा बंदोबस्त करशो, तो तमाराथी बंध नहि करावी शकाय. (१४९)

  108. जे माणसे आ वाणियाओनुं राक्षसी पाप पकडयुं हतुं, तो ए ज समये तेमना राक्षसी पापने छोडावीने वाणियाओने मारी नाख्या होत, तो फरीथी आ राक्षसी पाप चालतुं नहीं, परंतु गुप्त पाप करवावाळाने मार्या नहि तेथी गुप्त पाप चाली रह्युं छे. (१५०)

  109. पहेलां कोई राजाए राक्षसी पाप करवाना कारणे आ सौदागरोने सारी रीते कष्ट आप्युं हतुं. ते उपरांत जादु करवाना कारणे ज आ वाणिया लोकोनां मंदिरो पण पडावी दीधां हतां. त्यारे पण साचु बोल्या नहोता, तो अत्यारे केवी रीते साचुं बोलशे? (१५०)

  110. राजाओ तमारे ए वात ध्यानथी समजवी जोईए, के ज्यां सुधी ए पापने नहि छोडे त्यां सुधी एमनी प्रजा साथे कोईने जीवता ना छोडता. (१५१)

  111. मारा जीवतां-जीवतां तेमनुं पाप करवानुं छूटी जाय, नहीं तो फरी नहि छूटे. (१५१)

  112. पहेलांना समयनुं खूब धन हतुं. ते आ वाणियाओए पोताना राक्षसीपापथी खेंची-खेंचीने कोई टापु उपर जमा करी राख्युं छे. ते धन तो दुनियाना लोकोने खबर ना पडे ते रीते खेंचीने भेगुं करेलुं छे. (१५२)

  113. जो हुं आ सौदागरोनी जाळथी राजा-बादशाहोने माहितगार करूं छुं. तो आ सौदागरो पोताना राक्षसी पापथी तेमनी बुद्धिने फेरवी नाखे अने तेमना ज मोंढेथी एवी-एवी वातो खराब अने ढंगविनानी कहेवडावे छे, के साधु अनुपदास संसारमां जे वाणियाओनी जाळने जाहेर करी छे अने कपट-कपट पोकारतो फरे छे, तो ते साधुने वहेम थई गयो छे. (१६०)

  114. जो हुं आ महाजनोनी जाळ संसारने देखाडी रह्यो छुं. तो मने आ लोको पागल अने स्वार्थी कहे छे. (१६१)

  115. मने एवी-एवी वातो तो ना कहो, के गांडो, पागल अने वहेमी थई गयो छे. संसारना लोकोनो कोई दोष नथी, तेमने तो राक्षसी पापथी आ महाजनो एवुं ज सुझाडे छे. (१६१)

  116. आ वाणियानुं जाळ बंध करवामां आवे अने हुं आ जाळने बंध कराववा माटे सने (१८८१)थी कोशिश करी रह्यो छुं. तो त्यारथी कोशिश करतां करतां अमूक रजवाडाओने समजावीने मारी तरफेणमां करी लीधा छे अने जाण करी दीधी छे. (१६१)

  117. आ सौदागरोए एवी अक्कल खराब करी छे के समजाववा छतां समजता नथी. वाणियाओना कपटी परचा सरासर चाली रह्या छे, तेने साचा माने छे. अने कुदरते कर्युं एवुं माने छे. तेथी हुं अफसोसनी साथे तमारा लोकोनी ओछी बुद्धिने अने वाणियाओना राक्षसी पापने पहेलांथी लखीने जाहेर करूं छुं. जेथी लोकोने पोतानी ओछी बुद्धिनो ख्याल थाय. (१६१)

  118. आ पुस्तक कोई धर्मनी के ज्ञाननी बाबते नथी" (१६२)

  119. वाणियाओए पोताना राक्षसी पापनी ताकातथी बधानी बुद्धिने खराब करी दीधी छे. जेथी लोको भुलेला अने छकेला थई गया छे. (१६२)

  120. जमीनमाता पण जैन सौदागरोना राक्षसीपापना कारणे बिमारीओ भोगवी रही छे. (१६२)

  121. आ वाणिया एवा कजात छे, के जेवी रीते हिन्दुस्तानने अंदरो-अंदर लडावीने बरबाद करी दीधुं छे, एवी रीते बधी विलायतोने आपसमां लडावीने बरबाद करी देशे. आ वाणिया षडयंत्र करे छे. (१६७)

  122. ज्यारे माणस मरवानो थाय छे, त्यारे आ वाणिया तेमना राक्षसीपापथी मरवावाळानी जीभने बोलती बंध करी नाखे छे अने काची वयमां जादुथी मारी नाखे छे. (१७९)

  123. ए खबर पडती नथी, के आ वाणियाओना राक्षसीपापथी दुनियाना तमाम लोकोने माहितगार करुं छुं, तो पण लोको सांभळता नथी अने समजता नथी. उलटानुं बुद्धि फरी जवाने कारणे आ संसारना राजा-बादशाह अने साधु-संत मने पागल कहे छे अने समजता नथी. तो तेमनी एवी बुद्धि खराब करी दीधी छे. (१८२)

  124. जे धन वाणियाओए राक्षसी पापथी भेगुं कर्युं छे, तेने संसारना लोको बधा वहेंची लईने लई लेशो तो कोई दोष नथी. (१९१)

  125. पहेलांना जमानामां सूर्य चंद्र पोतपोताना नियम प्रमाणे उगता हता, के ज्यारे दिवस थतो हतो त्यारे सूरज उगतो हतो अने चंद्र पण पूनम जेवो उगतो हतो. तो संसारमां कहेवाय छे, के सत्युगमां चंद्रमा कायम पूरो उगतो हतो. ज्यारथी चंद्रमाना नामनुं पाप कराववानुं शरू कर्युं छे त्यारथी चंद्रमा पूरो उगतो नथी. (२१८)

  126. वद एकमथी चंद्रमाना नामनुं पाप करवानुं शरू करे छे ते अमास सुधी पंदर दिवस पाप एवी रीते करावे छे, के वद एकमे थोडुं पाप करावी चंद्रनी कळा थोडी ओछी घटाडे छे. पछी बीजना एकम करतां वधु पाप करावीने चंद्रनी कळा एकम करतां थोडी वधु घटाडे छे. पछी बीज करतां त्रीजना पाप वधुं करावे छे, त्यारे चंद्रमानी कळा बीज करतां वधु घटाडे छे. पछी त्रीज करतां चोथना वधु पाप करावे छे त्यारे चंद्रमां त्रीज करतां वधु घटे छे. चौथ करतां पांचमना वधु पाप करावे छे त्यारे चंद्रमानी कळा चौथ करतां वधु घटे छे. आवी रीते वद पक्षमां पंदर दिवस सुधी एटले के अमास सुधी दिवसे ने दिवसे वधु पाप चंद्रमाना नामनुं करावे छे. तेथी तेनी कळा घटती जाय छे अने अमासना एवी रीते वधु पाप करे छे, के चंद्रमां बिलकुल नथी उगतो. अने चंद्रमानी कळा घटतां-घटतां अमास सुधी तो अंधारी रात थई जाय छे. पछी एकमथी पाप करवानुं धीमे-धीमे ओछुं करता जाय छे, तो चंद्रमानी कळा थोडी वधे छे. अने बीजना पाप एकम करतां ओछुं करे छे, तो चंद्रमा देखावा लागे छे अने आ रीते दिवसेने दिवसे पाप करवानुं ओछुं करता जाय छे, तो दिवसे ने दिवसे चंद्रमानी कळा वधती जाय छे. तो पूनम सुधी चंद्रमां पूरो उगे छे. कारण के पूनमना चंद्रमाना नामनुं पाप बिलकुल छोडी दे छे त्यारे चंद्रमानी पूर्ण ज्योत थाय छे." (२१८-२१९)

  127. आ रोग एवो छे, के जेम माणसने आधासीसीनो रोग थाय छे अने माथुं दुःखे छे. एवी रीते जमीनमाताने आ आधासीसीनो रोग जादुथी कर्यो छे माटे चंद्रमाने घटाडे छे. आ आधासीसीनो रोग बारे महिना चालु राखे छे. एक फक्त पुनमना दिवसे नथी करावता. त्यारे चंद्र पूरो उगे छे." (२१९)

  128. आ वाणिया सूरज-चंदामाने एवां ग्रहण करावे छे, के पहेलांना जमानामां रावण सूरज-चंद्रमाने ग्रहण करतो हतो. (२१९)

  129. ज्यारे आ राक्षसीपाप बंध थशे, त्यारे सत्ययुगनी माफक कायम पूरो चंद्रमा उगशे. (२१९)

  130. जमीनमाताने करोडो रोग छे. ते आ वाणियाओए जादुनी शक्तिथी करेलां छे. (२२२)