जगत हितकारणी
अनुपदासनी करमकुंडळी अने तेना खूनी कारनामा
आ वेबसाइटनो उद्देश
अनुपदासना आंधळा अनुयायीओनां काळां कारस्तान
अनुपदास कोण हतो?
"जगत हितकारनी"ना प्रकाशननो इतिहास
अनुपदासना पुस्तकमांथी चोंकावनारी अने भेजांगेप वातो
अनुपदासनी शेतानियत, बेवकूफी, मूर्खता अने लुच्चाईने उजागर करतां केटलांक महत्त्वपूर्ण उद्धरणो
अमने तमारा समर्थननी जरूर छे
"जगत हितकारनी"ना प्रकाशननो इतिहास

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book of anupdas

उपर ‘जगत हितकारनी’नी सन १९०९मां एरणपुरा (मारवाड)थी प्रकाशित थयेल मूळ हिन्दी प्रत (डाबे)
तथा सन २००५मां गुजरातना गांधीनगर जिल्लाना झुंडालमांथी प्रकाशित थयेल तेनो गुजराती अनुवाद (जमणे) जोई शकाय छे.

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अनेक जैनोनी संपत्ति लूंटीने अनुपदासे ए ज धनमांथी "जगत हितकारनी" नामनुं पुस्तक हिन्दी भाषामां छाप्युं हतुं.

"जगत हितकारनी" पुस्तकमांनां जैनो सामे खुल्लेआम "मारो, कापो" जेवा शब्दो द्वारा हिंसानो पयगाम रजू करतां लखाणो अने चीतरी चडे तेवी गंदी भाषाना कारणे कोई प्रिंटिंग प्रेसनो मालिक तेनुं पुस्तक छापवा तैयार थतो नहोतो अने प्रेसना नामठाम वगर [जुओ फुटनोट #1] आ प्रकारनुं पुस्तक छापनार प्रेसना मालिकने जेलनी सजा थाय तेवा ब्रिटिश गवर्नमेन्टना कडक कायदा हता तेथी कोई पण प्रेसमां तेनुं पुस्तक छापी शकाय ते शक्य नहोतुं, आवा संजोगोमां अनुपदासे रीतसर पोतानो प्रिंटिंग प्रेस खरीघो हतो! वाचको ध्यानमां ले के जे जमानामां भारतमां प्रेस आयात करवो ए मोटा मोटा उघोगपतिओ माटे पण धोळा दिवसे तारा जोवा जेवुं काम हतुं ए जमानामां खोबा जेवडा तद्दन पछात कलांपुरा (ता. सुमेरपुर) जेवा पांचसो माणसनी वस्तीवाळा गामडामां प्रेस नाखवो ए केवुं मुश्केल कार्य हशे! एरणपुरा [जुओ फुटनोट #2] पासेना कलांपुरा गाममां मुश्केलीथी बे-चार जणा पासे ज साइकल जेवुं "आधुनिक वाहन" हतुं ए युगमां गरीब घरमां जन्मेला अनुपदासे रीतसर पोतानो प्रिंटिंग प्रेस खरीघो हतो! एक समयनो आ गरीब माणस जैनोना पैसा लूंटीने केटलो धनवान बनी गयो हतो ए आना परथी समजी शकाय छे! पोतानी ज मालिकीना "अनुपदास प्रिंटिंग प्रेस"मां सन १९०९मां तेणे "जगत हितकारनी"नी पहेली आवृत्ति छापी हती. आ पुस्तकमां देशद्रोही अनुपदासे अंग्रेज सरकारनी कदमबोसी [जुओ फुटनोट #3] करवा उपरांत, जैनो सामे मात्र अंग्रेजो ज काम पाडी शके तेम छे तेवा मस्का मारवाथी [जुओ फुटनोट #4] अने प्रजाना आझादी आंदोलनथी विपरीत अंग्रेज सरकारने खुल्लो टेको आपवाथी तेना शिरपाव रूपे सन १९१२मां तेने मुंबईना ख्यातनाम खेमराज श्रीकृष्णदास स्टीम प्रिंटिंग प्रेसमां बीजी आवृत्ति छापवानी खास परवानगी मळी हती! पोतानी मालिकीनो ज प्रिंटिंग प्रेस होवा छतां बीजी आवृत्ति ते युगना मुंबईना ख्यातनाम प्रेसमां छपाववानुं कारण ए के पहेली आवृत्तिनुं छापकाम खूब नबळुं हतुं अने अनुपदासे ताकातनुं प्रदर्शन करवा, नाखतां तो प्रिंटिंग प्रेस नाखी दीधो हतो पण पोताना पछात विस्तारमां ते प्रेस चलावी शके एवा कुशळ कारीगरो लावी शक्यो नहोतो. क्यांथी लावी शके!

Anupdas kaa khuni panjaa

"जगत हितकारनी" पुस्तक अंगे खरोखरो रसप्रद सवाल तो ए छे अनुपदास तद्दन "अंगूठाछाप" हतो तो तेणे आ पुस्तक लख्युं केवी रीते? आनुं समाधान ए छे के अनुपदास बोलतो जतो हतो अने सामान्य अक्षरज्ञान धरावनारो तेनो एक सागरीत लखतो जतो हतो अने ए रीते आखुं पुस्तक तैयार थयुं हतुं. माटे ज आ पुस्तकमां ढंगधडा वगरनां लखाणो अने वारंवार एकनी एक वातनुं पिष्टपेषण आवे छे!

आखुं "जगत हितकारनी" पुस्तक गंदकीथी खदबदतुं, सनेपातना लवारा जेवुं अने जैनोने चोर, राक्षस, ढेड, बदमाश, दुष्ट, हरामखोर, जालिम, कजात वगेरे तरीके ओळखावनारूं छे.

— जी हा, उपरना फकरामां जणावेला आ बधा ग्रीन बोल्ड शब्दो एणे पोताना पुस्तकमां जैनो माटे वापर्या छे.

"जगत हितकारनी" पुस्तकमां जगतना हितमां शी वातो छे तेनी तो खुद अनुपदासने पण खबर नहीं होय.

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  1. अत्यारे पण गुजराती जगत हितकारणी पुस्तक प्रेसना नामठाम वगर ज छपायुं छे.

  2. आ एरणपुरा एटले अत्यारनुं शिवगंज

  3. (a) ‘दयालु महाराजाधिराज पंचम जॉर्ज बहादुर की खिदमत में हाथ जोडकर अर्ज करता हूं कि....’ (मूळ हिन्दी पुस्तकनी भूमिकामांथी)

  4. (b) ‘मैं परम दयालु परमेश्वर तथा प्रजारक्षक अंग्रेज महाराज से फिर भी प्रार्थना पूर्वक कहता हूं कि आप मुझ गरीब अनुपदास की इस सर्वहितकारनी प्रार्थना को स्वीकार कर मुझे अनुग्रहित करेंगे.’ (मूळ हिन्दी पुस्तकनी भूमिकामांथी)

  5. आ जाळ तमारा अंग्रेजोनां संतानोथी ज बंध करावी शकाशे.’ (जगत हितकारणी पृ. २०७)